भाईदूज: भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व |

दीपों की जगमगाहट और मिठाइयों की खुशबू के बीच जब दीपावली का उत्सव समाप्ति की ओर बढ़ता है, तभी आता है भाई-बहन के प्यार से भरा भाईदूज। यह त्योहार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि उस अनमोल रिश्ते का उत्सव है जिसमें नोक-झोंक भी है, अपनापन भी, और ढेर सारा प्यार भी।

भाईदूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई भी बहन को उपहार देते हैं और जीवनभर उसकी रक्षा करने का वचन निभाने का संकल्प दोहराते हैं।कहते हैं कि यमराज अपनी बहन यमी (या यमुना) के घर इस दिन पहुंचे थे। यमी ने उनका स्वागत तिलक और मिठाई से किया था। तभी से यह परंपरा शुरू हुई — इसलिए इसे “यम द्वितीया” भी कहा जाता है।

आज के समय में भले ही भाई-बहन अलग शहरों या देशों में रहते हों, पर यह दिन उन्हें फिर से जोड़ देता है। वीडियो कॉल पर तिलक हो या पोस्ट से भेजा गया गिफ्ट बॉक्स — भाईदूज का प्यार दूरी नहीं मानता।

भाईदूज हमें याद दिलाता है कि रिश्तों की खूबसूरती भौतिक चीज़ों में नहीं, बल्कि उस स्नेह और विश्वास में है जो हमें जोड़कर रखता है। इसलिए इस भाईदूज पर सिर्फ उपहार ही नहीं, थोड़ा समय और ढेर सारा प्यार भी दीजिए — क्योंकि वही इस त्योहार की सच्ची मिठास है।

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