दिल्ली का स्मॉग अब सिर्फ़ फेफड़ों का दम नहीं घोंट रहा, बल्कि जोड़ों पर भी हमला कर रहा है!दिल्ली-एनसीआर में रूमेटॉइड आर्थराइटिस, यानी गठिया की एक गंभीर बीमारी, तेजी से बढ़ रही है — और इसका बड़ा कारण है वायु प्रदूषण। दिल्ली में जारी IRACON 2025 सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञों ने चौंकाने वाले तथ्य रखे हैं। उनके मुताबिक, ज़हरीली हवा और PM 2.5 जैसे प्रदूषक सिर्फ सांस की तकलीफ नहीं बढ़ाते, बल्कि शरीर की इम्यून सिस्टम को भी नुकसान पहुँचाते हैं। यही वजह है कि आज बिना पारिवारिक इतिहास वाले युवा भी गठिया से पीड़ित हो रहे हैं। AIIMS की डॉ. उमा कुमार कहती हैं — “हम ऐसे मरीज देख रहे हैं जिनका कोई जेनेटिक कारण नहीं, फिर भी प्रदूषण के कारण उनके जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न बढ़ रही है।” फोर्टिस अस्पताल के डॉ. बिमलेश धर पांडेय बताते हैं — “सड़कों के पास रहने वाले लोग, ट्रैफिक के धुएं में रोज़ रहने वाले — गठिया के सबसे ज़्यादा खतरे में हैं।” सर गंगा राम अस्पताल के डॉ. नीरज जैन का कहना है — “प्रदूषण अब वो नया दुश्मन है जो स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना रहा है।” और अपोलो अस्पताल की डॉ. रोहिणी हांडा चेतावनी देती हैं — “अगर हवासाफ़ नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ी ऑटोइम्यून बीमारियों से अपंग हो जाएगी।” अध्ययनों से साफ़ है PM 2.5 के लंबे संपर्क से गठिया का खतरा 12 से 18% तक बढ़ जाता है।यानी, प्रदूषण अब सिर्फ़ साँस की नहीं, जोड़ों की बीमारी भी बन चुका है। विशेषज्ञों का एकजुट संदेश है अब वक्त आ गया है कि साफ़ हवा को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाया जाए। क्योंकि याद रखिए — जो हवा हम साँस में लेते हैं, वही अब हमारे जोड़ों का दर्द बन रही है।



